जब स्टूडेंट को हुआ टीचर से प्यार - Love Story in Hindi

जब स्टूडेंट को हुआ टीचर से प्यार – Love Story in Hindi (Student Teacher love story)

उन होठों को छू कर उनकी रूह में उतर जाऊं।
मन पागल मन भँवरा मैं कैसे बिसर जाऊं।।
ख्वाहिश थी उस रात दरबदर करने की।
वो आगोश में जो आयें फिर मैं पिघल जाऊं।।
मन पागल मन भँवरा मैं कैसे बिसर जाऊं ।।।


यह बात पिछली जनवरी की है जब हम दोनों स्वतंत्रता दिवस के लिए प्रोग्राम का रिहर्सल कर रहे थे. प्रिंसिपल ने डिसाइड कर दिया था कि लंच के बाद आखिरी के दो पीरियड्स रिहर्सल के होंगे. अब प्रोग्राम के सिर्फ 4 दिन ही बचे थे. लंच के बाद वाली अंग्रेजी की पीरियड बोरिंग होने की वजह से मैं क्लास बंक कर रिहर्सल रूम जाना बेहतर समझी। म्यूजिक रूम की तरफ कदम बढ़ते ही उनकी सुरीली आवाज मेरे कानों में पड़ी। लगा जैसे बिरहा के बादल ने मेरे तन को छू लिया हो। दिल थम सा गया और उस संगीत की धून ने मुझे जैसे अपनी आगोश में ले लिया हो।

धुन रुकी, साज रुके और उनकी निगाहें मेरी निगाहों से टकराई। शायद मेरी आंखों की गुस्ताख भरी निगाहों और उनकी धुन पर थिरकते मेरी सांसो की हलचल ने उन्हें मेरा हाले-दिल बयां कर दिया था। “ऐसे क्या देख रही हो?” थोड़े शरारती अंदाज में मुस्कुराते हुए उन्होंने मुझसे पुछा। “कुछ नहीं सर!” यह कहते हुए मैं थोड़ा घबराई। “क्लास करने का इरादा नहीं है क्या?” मैंने सिर्फ सिर हिला कर जवाब दिया, नहीं! तुम अच्छी लगती हो, खुले बालों में। मैं उनकी बात काटते हुए बोली सर मुझे भी आपके जैसे गाना है। मेरी संगीत में बेहद रुचि है। यह सुनकर वे बेहद प्रसन्नता से मुस्कुराते हुए बोले- ठीक है! तुम जब चाहो वक्त लेकर मेरे कमरे पर आ सकती हो या मुझे ट्यूशन के लिए अपने घर बुला लो। मैंने कहा- नहीं सर! मेरे घर मेरी दो और भी बहने हैं, डिस्टरबेंस होगी इसलिए आपके कमरे पर ही ज्यादा सही रहेगा।

फिर वो वक्त आया। जब साज थी संगीत थी।।
पहली थी क्लास मेरी। पर… उस दिन जो हुआ,
हम दोनों की मनमीत थी ।।।

उस दिन स्कूल खत्म होने के बाद मैं घर गई। धड़कनों पर जैसे मेरा काबू न रहा। ज़ी घबरा रहा था.. शायद! यह बेचैनी थी उनसे मिलने की। यह तय नहीं कर पा रही थी कि क्या पहनूं? फिर ख्याल आया उस स्कर्ट और स्लीवलैस वाले टॉप का जिसे मेरी सहेली ने बर्थडे पर गिफ्ट दिया था। घर में कपड़ों को लेकर रिस्ट्रिक्शन होने के कारण उसे 2 सालों में कभी पहन ही नहीं पाई। पर अब खुद को जीना चाहती थी मैं.. अब परवाह नहीं थी पापा के डांट की। मम्मी के फटकार की।। बस अब पिंजरे से मुक्त होकर आसमां की परिंदा बनना चाहती थी मैं।



मैं निकल पड़ी, अपनी दोपहिया उड़नखटोले पर सवार होकर सपनों की सैर पर। मैं उनके बुलाए वक्त से ठीक 15 मिनट पहले उनकी कॉलोनी में पहुंच चुकी थी। उनके दरवाजे पर पहुंच कर मैंने साइकिल की घंटी मारी। बस आया! यह कहते हुए वे बाहर आये।

आओ! अंदर आओ साक्षी। यह कहकर लरज़ते होठों से चंद बोल गुनगुनाते हुए वे मुझे अंदर ले गए। “तुम ठहरो! मैं रेडी होकर आता हूं।“

“अच्छे लग रहे हैं…सर, कोई तैयार होने की जरूरत नहीं!”

यह पहली दफा था जब उनकी पींचिंग पर्सानिलिटी को इतने करीब से देख रही थी।

सर मैं सिर्फ 1 घंटे के लिए मम्मी से झूठ बोल कर आई हूं कि सौम्या के बर्थडे पर जा रही हूं।

“झूठ बोलने की क्या जरूरत थी? म्यूजिक क्लास है, बता देती! यह कहते हुए वह वापस आकर मेरे सामने सोफे पर बैठ गए। फिर तिरछी इशारे कर मुझे भी बैठने को कहा।

वाओ सर! यहां तो लगभग सारे ही म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स हैं। लेकिन, मुझे गिटार बेहद पसंद है। क्या आप मुझे सिखाएंगे? यह कहते हुए मैं डाइनिंग हॉल में गिटार की तरफ आगे बढ़ी। थोड़ा उचक कर दीवार पर टंगी गीटार उतारनी चाही।

“नाइस टैटू!” यह कहते हुए वह पीछे से मेरे करीब आ गए। उन्होंने दीवार पर टंगा गिटार उतार कर मेरी ओर बढ़ाया। मैं शर्म से पानी हो गई। शायद मेरे कमर पर पीछे की तरफ बने टैटू वो देख चुके थे। झूकी नज़रों से “थैंक्यू”! कहते हुए मैं वापस सोफे की ओर बढ़ी। चार कदम चली ही थी कि लगा, जैसे धड़कनें बढ़ने लगी। और उनकी नौटी स्माइल मेरी रुह में उतरने लगी हो। उनके हाथ मेरे खुले बालों के बीच जो था। शायद मैं गिर रही थी। अगले ही पल जब आंखें खुली तो खुद को सोफे पर लेटे पाया। “तुम्हें क्या हो गया था?” अचानक तुम गिर रही थी।

शुक्रिया! मुझे बचाने के लिए उनके हाथ को अपने दोनों हाथों के बीच रखते हुए मैंने कहा। मैंने उनसे पूछा- सर, आप कल क्लास में क्या कह रहे थे कि मैं आपको बहुत अच्छी लगती हूं खुले बालों में। थोड़ा शरमाते हुए आंखों में जज्बात के पानी लिए वे बोले- हां!

उनकी जज्बात भरी भारी आवाज ने उनका हाल-ए-दिल बयां कर दिया था। “मैं भी आपको बेहद पसंद करने लगी हूं, पिछले 1 हफ्ते से जब से आपको देखा है। क्या आप 26 जनवरी के बाद चले जाएंगे?

“नहीं! अगर तुम कहो तो सारी उम्र मैं इसी शहर में गुजार दूं।“ यह कहते हुए वह मेरे बेहद करीब आ गए जहां हम एक दूजे के सांसो की बढ़ती आवाजें  सुन सकते थे। मैंने पुछा- यह क्या कर रहे हैं आप?” जवाब शून्य था….


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